Chhath Puja 2022 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Timings: कब दिया जायेगा सूर्य को ऊषा अर्घ्य, क्या है शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र, महत्व और कथा
कब मनाया जाता है छठ पूजा का पर्व
क्यों करते हैं छठ पूजा
छठ पूजा का शुभ मुहूर्त
जानिए नहाय-खाय, खरना, अर्घ्य, पारण और पूजा की विधि | Know Nahai-Khay, Kharna, Arghya, Paran and method of worship:-
भगवान सूर्य देव को सम्पूर्ण रूप से समर्पित यह त्योहार पूरी स्वच्छता के साथ मनाया जाता है। रामायण और महाभारत जैसी पौराणिक शास्त्रों में भी इस पावन पर्व का उल्लेख है।हिन्दू धर्म में इस पर्व का एक अलग ही महत्व है, जिसे पुरुष और स्त्री बहुत ही सहजता से पूरा करते है। चार दिनों तक मनाये जाने वाले इस पर्व के दौरान शरीर और मन को पूरी तरह से साधना पड़ता है।
मंत्र :-
नहाय-खाय:-
छठ व्रत की शुरुआत नहाय खाय के साथ होती है। यह व्रत का पहला दिन होता है। इस दिन स्नान के बाद साफ-सुथरे वस्त्र पहने जाते हैं व पूजा के बाद व्रती अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी को प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे। खाने में कद्दू का महत्व बेहद विशेष है और इसे जरूर इस दिन खाया जाना चाहिए। इस दिन पूजा की तैयारी आदि भी की जाती है।
खरना या लोहंडा:-
यह व्रत का दूसरा दिन होता है। व्रत करने वाले इस पूरे दिन उपवास करते हैं। रात्रि में स्नान कर भगवान भाष्कर का ध्यान करने के बाद रोटी और गुड़ से बनी खीर का प्रसाद तैयार कर सूर्य देव और छठी मईया को अर्पित करते हैं । उसके बाद व्रती स्वयं प्रसाद के रूप में खीर,रोटी और फल आदि ग्रहण करते हैं । इस दिन नमक भी नहीं खाया जाता है। साथ ही पड़ोसियों और नाते-रिश्तेदारों को भी प्रसाद खिलाने के लिए बुलाया जाता है।
संध्या अर्घ्य:-
षष्ठी तिथि को उपवास रखकर व्रतियां प्रसाद बनाती हैं।प्रसाद आदि बन जाने के बाद शाम को बांस से बने दउरा में ठेकुआ, फल, ईख समेत अन्य सामग्रियां, लड्डू, जल, दूध आदि दूसरी चीजें से सजाया जाता है।परिवार के लोग व्रत करने वाले के साथ इस टोकरी को उठाकर किसी नदी या तालाब के किनारे जाते हैं और डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस पूरे दिन व्रती उपवास करते हैं और जल भी ग्रहण नहीं किया जाता है।
सुबह का अर्घ्य:-
छठ पूजा के चौथे दिन सुबह सूर्योदय के वक्त भगवान सूर्य को अर्ग दिया जाता है। आज के दिन सूर्य निकलने से पहले ही व्रती व्यक्ति को घाट पर पहुंचना होता है और उगते हुए सूर्य को अर्ग देना होता है। अर्ग देने के तुरंत बाद छठी माता से घर-परिवार की सुख-शांति और संतान की रक्षा का वरदान माँगा जाता है। इस पावन पूजन के बाद सभी में प्रसाद बांट कर व्रती खुद भी प्रसाद खाकर व्रत खोलते है।
इस पर्व से जुड़ी एक पौराणिक परंपरा के अनुसार जब छठी माता से मांगी हुई इच्छा पूरी हो जाती है तब सारे वर्ती सूर्य भगवान की दंडवत आराधाना करते है। सूर्य को दंडवत प्रणाम करने की विधि काफी कठिन होती है। दंडवत प्रणाम की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है: पहले सीधे खड़े होकर सूर्य देव को सूर्य नमस्कार किया जाता है और उसके पश्चात् पेट के बल जमीन पर लेटकर दाहिने हाथ से जमीन पर एक रेखा खिंची जाती है। इस प्रक्रिया को घाट पर पहुँचने तक बार-बार दोहराया जाता है। इस प्रक्रिया से पहले सारे वर्ती अपने घरों के कुल देवता की आराधना करते है।
छठ पूजा क्यों की जाती है? | Why is Chhath Puja performed?
इस सवाल पर अनेकों ऋषियों एवं विद्यावानों के अलग-अलग राय है। इसी वजह से इस पवित्र पर्व को लेकर कई कथाएँ सामने आती है। इनमें से प्रमुख कहानियां कुछ इस प्रकार है:
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्री राम ने रावन को मार कर लंका पर विजय हासिल की थी, तब अयोध्या वापस आ कर उन्होंने सूर्यवंशी होने के अपने कर्तव्य को पूरा करने हेतु अपने कुल देवता भगवान सूर्य की आराधना की थी। उन्होंने देवी सीता के साथ इस पावन व्रत को रखा था। सरयू नदी में शाम और सुबह सूर्य को अर्ग दे कर उन्होंने अपने व्रत को पूर्ण किया। उन्हें देख कर आम व्यक्ति भी इसी भाति छठ व्रत को रखने लगे।
महाभारत कथाओं के अनुसार जब कर्ण को अंग देश का राजा बनाया गया तब वो नित-दिन सुबह और शाम सूर्य देव की आराधना करते थे। खास कर हर षष्ठी और सप्तमी को सूर्य पुत्र अंग राज कर्ण भगवान सूर्य की विशेष पूजा करते थे। अपने राजा को इस तरह पूजा करते देख अंग देश की जनता भी प्रतिदिन सूर्योदय और सूर्यास्त पर भगवान सूर्य की आराधना करने लगे और देखते ही देखते यह पूजा पुरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हो गयी।
एक और कथा अनुसार साधु की हत्या का प्राश्चित करने हेतु जब महाराज पांडु अपनी पत्नी कुंती और माद्री के साथ वनवास गुजार रहे थे। उन दिनों पुत्र प्राप्ति की अभिलाषा ले कर रानी कुंती ने सरस्वती नदी में भगवान सूर्य को अर्ग दिया था। इस पूजा के कुछ महीनो बाद ही कुंती पुत्रवती हुई थी। इस पर्व को द्रौपदी द्वारा भी किया गया है। कहते है, इस पर्व को करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
छठ पूजा करने वाले वर्तियों को कई तरह के नियमों का पालन करना पड़ता है। उनमें से प्रमुख नियम निम्नलिखित है:-
- इस पर्व में पुरे चार दिन शुद्ध कपड़े पहने जाते है। कपड़ो में सिलाई ना होने का पूर्ण रूप से ध्यान रखा जाता है। महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती धारण करते है।
- पुरे चार दिन व्रत करने वाले वर्तियों का जमीन पर सोना अनिवार्य होता है। कम्बल और चटाई का प्रयोग करना उनके इच्छा पे निर्भर करता है।
- इन दिनों प्याज, लहसुन और मांस-मछली का सेवन करना वर्जित है।
- पूजा के बाद अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार ब्राम्हणों को भोजन कराया जाता है।
- इस पावन पर्व में वर्तियों के पास बांस के सूप का होना अनिवार्य है।
- प्रसाद के तौर पर गेहूँ और गुड़ के आटों से बना ठेकुआ और फलों में केले प्रमुख है।
- अर्ग देते वक्त सारी वर्तियों के पास गन्ना होना आवश्यक है। गन्ने से भगवान सूर्य को अर्ग दिया जाता है।