
तुलसीदास जयंती 2025: रामचरितमानस के रचयिता को श्रद्धांजलि
तुलसीदास जयंती 2025 में 31 जुलाई को मनाई जाएगी। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस, हनुमान चालीसा जैसी अमर कृतियाँ रचकर भारतीय संस्कृति को अमूल्य धरोहर दी। जानिए उनके जीवन, साहित्य और भक्ति के महत्व के बारे में।
31 जुलाई की प्रभात…
श्रावण के शुक्ल सप्तमी का दिवस …
ब्रह्ममुहूर्त में मन्दिरों की घंटियाँ गूंज रही हैं,
घरों में तुलसी चौरे पर दीप जल रहा है।
मन में राम… होंठों पर मानस की चौपाइयाँ।
आज का दिन कोई सामान्य दिन नहीं —
आज का दिन शब्दों के ऋषि, भक्ति के सूर्य और मर्यादा के गायक का जन्मदिवस है — गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती।
🌸 तुलसीदास: जिनके शब्दों में राम जीते हैं
भारत की भूमि पर अनेक संत और कवि जन्मे —
पर तुलसीदास ऐसे संत थे,
जिन्होंने राम को जन-जन के निकट लाया।
उन्होंने भक्ति को संस्कृत की परिधि से निकालकर अवधी की सरलता में ढाला।
उनकी लेखनी से निकला —
“रामचरितमानस”,
जिसने भारत के कोने-कोने में धर्म, नीति और करुणा का दीप प्रज्वलित किया।
📚 कलम से रची गई एक जीवनदीपिका

तुलसीदास जी ने साहित्य को साधना बनाया।
उनकी हर रचना एक दीप है —
जो पथ को आलोकित करती है।
- रामचरितमानस — लोकभाषा में रामकथा का अद्वितीय ग्रंथ
- हनुमान चालीसा — शक्ति, आस्था और विजय का स्त्रोत
- विनय पत्रिका — आत्मा की पुकार
- कवितावली, दोहावली — नीति, ज्ञान और विवेक की सीख
उन्होंने कहा:
“सिय राममय सब जग जानी। करहूं प्रणाम जोरि जुग पानी॥”
और इस एक पंक्ति में
ईश्वर को केवल मंदिरों से नहीं, पूरे जगत में देखने की दृष्टि दे दी।
🕊️ रामभक्ति की पराकाष्ठा

तुलसीदास केवल कवि नहीं थे —
वे राम नाम के आराधक, शब्दों के तपस्वी, और
धर्म के प्रहरी थे।
उनकी साधना में भाषा नहीं, आत्मा बोली करती थी।
उनका जीवन एक संदेश है —
कि जब समाज मार्गभ्रष्ट हो,
तो एक अकेली कलम भी संस्कारों की धारा बहा सकती है।
🪔 तुलसीदास जयंती क्यों है विशेष?
यह केवल एक संत का जन्मदिवस नहीं —
यह उस संस्कृति की विजय का उत्सव है,
जो भक्ति और मर्यादा के पथ पर चलती है।
यह उस भारत की स्मृति है,
जहाँ एक बालक माता-पिता से विछिन्न होकर
संपूर्ण राष्ट्र का आध्यात्मिक पिता बन गया।
📅 तारीख याद रखें:
📌 तुलसीदास जयंती 2025
🗓️ 31 जुलाई (गुरुवार)
🕉️ श्रावण शुक्ल सप्तमी
🌼 तुलसीदास जी को वंदन कैसे करें?
- अपने घर में रामचरितमानस का पाठ करें
- तुलसी के पौधे पर दीप जलाकर उनका स्मरण करें
- बच्चों को रामकथा सुनाएँ
- उनके दोहे और चौपाइयाँ जीवन में उतारें
- किसी एक बुरी आदत को त्यागकर उनके चरणों में समर्पित करें
🔱 एक भावभीनी वंदना
गोस्वामी तुलसीदास —
आपने भक्ति को लोकभाषा में उतारा,
आपने कविता को धर्म का सेतु बनाया,
आपने जीवन को राममय किया।
31 जुलाई को भारतवर्ष आपकी वंदना करता है,
वाणी की दीपशिखा से,
श्रद्धा की गंगा से,
और आत्मा की मौन प्रार्थना से।
🙏 “रामचरितमानस” के प्रत्येक अक्षर में आप जीवित हैं।
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